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राहुल गांधी ने वन स्टॉप सेंटर व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल सरकार पर आरोप

Satyakhabarindia

कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने रविवार को केंद्र सरकार के ‘वन स्टॉप सेंटर’ (OSCs) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ये केंद्र हिंसा से प्रभावित महिलाओं को सहायता देने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनकी स्थिति संतोषजनक नहीं है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और महिलाओं की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उनके अनुसार, सुरक्षा केवल एक योजना नहीं बल्कि सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है, जिसे प्रभावी ढंग से निभाया जाना चाहिए।

संसद में उठे सवाल और सरकार पर अनदेखी का आरोप

राहुल गांधी ने अपने व्हाट्सऐप चैनल पर साझा किए गए पोस्ट में बताया कि उन्होंने संसद में भी इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने सवाल किया कि जब कोई महिला हिंसा से बचकर वन स्टॉप सेंटर पहुंचती है तो उसे मदद क्यों नहीं मिलती और कई जगहों पर उसे खाली हाथ क्यों लौटना पड़ता है। उन्होंने स्टाफ की कमी, 24×7 संचालन में दिक्कत और देशभर से आ रही शिकायतों पर सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। राहुल ने यह भी पूछा कि यदि व्यवस्था सही है तो फिर हर पांच में से तीन महिलाओं तक मदद क्यों नहीं पहुंच पा रही है।

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बजट और संसाधनों के उपयोग पर भी उठे सवाल

कांग्रेस नेता ने यह भी दावा किया कि महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के बजट में वन स्टॉप सेंटर के लिए पर्याप्त संसाधन आवंटित नहीं किए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल किया कि हर 100 रुपये में से केवल 60 पैसे ही OSCs पर क्यों खर्च किए जा रहे हैं। राहुल गांधी का कहना है कि सरकार हर चीज को ‘संतोषजनक’ बताकर जवाब दे रही है, जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर पेश करती है। उन्होंने इसे सरकार की प्राथमिकता और संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़ा करने वाला मुद्दा बताया।

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सरकार का जवाब और मंत्रालय की स्थिति

दूसरी ओर, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने संसद में दिए अपने जवाब में बताया कि OSCs ‘मिशन शक्ति’ के ‘संबल’ वर्टिकल का हिस्सा हैं, जो हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक ही स्थान पर मेडिकल, कानूनी, पुलिस सहायता और परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल 2015 से 31 दिसंबर 2025 तक देशभर में 13.37 लाख से अधिक महिलाओं को इन केंद्रों के माध्यम से सहायता दी गई है। मंत्रालय के अनुसार, इन योजनाओं का मूल्यांकन NITI Aayog के माध्यम से कराया गया, जिसमें इसे संतोषजनक पाया गया। साथ ही, OSC योजना का क्रियान्वयन राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन के जिम्मे है, जिससे इनकी कार्यप्रणाली में क्षेत्रीय स्तर पर अंतर भी देखा जाता है।

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